डिंडौरी। जिले के शहपुरा जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मोहनीमाल स्थित आंगनवाड़ी परिसर में रतनजोत के बीज खाने से दो बच्चों की तबीयत बिगड़ने के मामले में प्रशासन ने संज्ञान लिया है। घटना के बाद शहपुरा एसडीएम ने मोहनीमाल आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान परिसर में लगे रतनजोत के पौधों को हटवाया गया, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
उल्लेखनीय है कि आंगनवाड़ी परिसर में लगे रतनजोत के पौधों के बीज खाने से दो बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी। बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी स्थिति को देखते हुए देर रात बेहतर उपचार के लिए जबलपुर रेफर किया गया था। इस घटना के बाद आंगनवाड़ी परिसर में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे।
एसडीएम के निरीक्षण के दौरान परिसर की स्थिति का जायजा लिया गया और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर रतनजोत के पौधों को हटवाने की कार्रवाई की गई। हालांकि, इस पूरे मामले ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और संबंधित सुपरवाइजर की जिम्मेदारी एवं निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर परिसर में बच्चों के लिए संभावित रूप से खतरनाक पौधे मौजूद होने के बावजूद समय रहते उन्हें हटाने की पहल क्यों नहीं की गई? बच्चों की देखरेख और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना आंगनवाड़ी अमले की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
निरीक्षण और पौधे हटाने तक ही सीमित रहेगी कार्रवाई?
दो मासूम बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका सहित संबंधित सुपरवाइजर की कथित लापरवाही पर कार्रवाई कब होगी? क्या जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जाएगी या फिर पौधे हटवाकर ही मामले को समाप्त मान लिया जाएगा? बच्चों की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर विभागीय स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
इस घटना के बाद जरूरी है कि जिले के अन्य आंगनवाड़ी केंद्रों का भी निरीक्षण किया जाए और परिसर में मौजूद बच्चों के लिए संभावित रूप से खतरनाक पौधों एवं अन्य जोखिमों को चिन्हित कर हटाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।










