डिंडौरी। सरकारी अस्पतालों में सर्व सुविधा युक्त ईलाज के दावों के बीच जिला अस्पताल सहित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जीवन रक्षक इंजेक्शन की भारी कमी बनी हुई है। शासन स्तर पर दवाओं की सप्लाई श्रृंखला लड़खड़ाने को इसकी वजह माना जा रहा है। जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। अति आवश्यक इंजेक्शनों की इस कमी में मरीजों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी अस्पताल में इनकी अनुपलब्धता के कारण मरीज बाहर मजबूरी में इनको खरीद रहे हैं। इंजेक्शनों की कमी के कारण स्वास्थ्य कर्मियों और परिजनों के बीच विवाद की भी स्थिति बन रही है। जहां मरीज मुफ्त सेवाओं का हवाला देकर अस्पताल से ही इंजेक्शन उपलब्ध कराने की जिद कर रहे हैं। वहीं अस्पताल में इंजेक्शन की उपलब्धता न रहने से स्वास्थ्य कर्मी भी कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं है। गौरतलब है कि सात प्रमुख जीवन रक्षक इंजेक्शन की कमी जिला अस्पताल में बनी है उनमें से बुखार और दर्द कम करने से लेकर पोषण तत्वों की कमी दूर करने संबंधी इंजेक्शन शामिल हैं। जो नियमित तौर पर मरीजों को देना अति आवश्यक है। बावजूद इसके जिला अस्पताल में इन प्रमुख इंजेक्शनों की कमी समझ से परे है। प्रति इंजेक्शन इनकी बाजार कीमत पचास रुपये से लेकर पांच सौ रूपये तक है। यह इंजेक्शन मरीजों को दिन में दो से तीन बार लगाने पड़ते हैं। नतीजन इनको बाजार से खरीदना गरीब मरीजों की जेब पर भारी पड रहा है।
डिमांड के बावजूद नहीं हो रही पूर्ति
विभागीय नियमानुसार दवाओं की डिमांड स्वास्थ्य विभाग के एमपी औषधि पोर्टल के माध्यम से की जाती है और इसी पोर्टल के सहारे दवाओं की सप्लाई सुनिश्चित की जाती है। प्रावधान के मुताबिक जिले भर के स्वास्थ्य केन्द्रों से औषधियों की डिमांड जिला स्तर पर औषधि भंडार शाखा पहुंचती है जहां से ऑनलाइन तरीके से पोर्टल पर डिमांड दर्ज कराई जाती है। मांग के विरूद्व पूर्ति हेतु 45 दिन की अवधि नियत है। अन्यथा संबंधित सप्लायर पर पेनाल्टी का भी प्रावधान है। बावजूद इसके जिले में जीवन रक्षक औषधियों की कमी बनी हुई है। सूत्रों की माने तो लगातार बरती जा रही इस लापरवाही के मद्देनजर अब संभाग स्तर पर ही ड्रग हाउस की स्थापना पर विचार किया जा रहा है। जिससे सप्लाई में अनावश्यक देरी पर लगाम लगाई जा सकती है।
इन इंजेक्शनों की कमी-
पेरासिटामोल:- यह एक दर्द निवारक और बुखार कम करने वाली दवा है। इसका उपयोग तेज बुखार को नियंत्रित करने, ऑपरेशन के बाद होने वाले दर्द से राहत दिलाने के साथ ही मांसपेशियों या जोड़ों के दर्द में काम आता है।
सेफ्ट्रिएक्सोनः– एक शक्तिशाली एंटीबायोटिक है। जिसका उपयोग विभिन्न गंभीर बैक्टीरियल (जीवाणु जनित) संक्रमणों के इलाज के लिए किया जाता है। निमोनिया, किडनी और अन्य संक्रमणों पर यह असरदार होता है।
पिप्टाज इंजेक्शनः- एक जरूरी एंटीबायोटिक है। इसका उपयोग निमोनिया और फेफड़ों के संक्रमण के साथ महिला प्रजनन अंगों के संक्रमण को नियंत्रित करने में होता है। यह भी एक अति आवष्यक इंजेक्षन है।
मेरोपेनेम इंजेक्शन:- यह एक गंभीर जीवाणु (बैक्टीरियल) संक्रमणों के इलाज के लिए उपयोगी साबित होता है। डॉक्टर द्वारा मेरोपेनम इंजेक्शन मुख्य रूप से मस्तिष्क और मूत्र मार्ग के संक्रमण को रोकने में किया जाता है।
पैंटोप इंजेक्शन– यह एसिडिटी के लिए आवश्यक दवा है। मरीज के ओरल तरीके से दवा न लेने की स्थिति में इस इंजेक्शन को दिया जाता है। पेट के छालों और घावों के इलाज के लिए यह लाभदायक है।
बी-कॉम्प्लेक्स इंजेक्शन:- इसका मुख्य उपयोग शरीर में विटामिन की कमी को पूरा करने और एनीमिया के खतरे को कम करने में किया जाता है। यह थकान, कमजोरी और सुस्ती को दूर करके शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में मददगार साबित होता है।
मल्टीविटामिन इंजेक्शन– इसका मुख्य कार्य शरीर में कुपोषण को दूर करने में किया जाता है। इसका फायदा लंबे समय की बीमारी या कमजोरी के बाद शरीर को तुरंत एनर्जी और पोषक तत्व प्रदान करना है।
इनका कहना है-जिले में दवाओं की कमी बनी हुई है, विभागीय पोर्टल एमपी औषधि के माध्यम से मांग की जा रही है। जहां से पूर्ति प्रभावित हो रही है। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को प्रेषित की गई है। अति आवश्यक परिस्थितियों में दवाओं की पूर्ति हेतु स्थानीय तौर पर प्रयास जारी है।डाॅ. मनोज पांडे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डिंडौरी









