डिंडौरी। जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत गुरैया में लाखों रुपये के निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता और शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर होता नजर आ रहा है। अमृत सरोवर, गेबियन स्ट्रक्चर, मिनी परकुलेशन टैंक, चेकडैम, सीसी सड़क और स्वागत द्वार निर्माण में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर शहपुरा एसडीएम की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में फर्जी बिल-वाउचर के जरिए सरकारी राशि आहरित किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
मामले में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर एसडीएम शहपुरा ने जनपद पंचायत सीईओ को दोबारा स्मरण पत्र जारी किया है। 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में 21 कार्य दिवस के भीतर स्पष्ट एवं बिंदुवार जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार स्मरण पत्र जारी होने के बावजूद जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि निर्धारित समय-सीमा में जांच पूरी कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाती है या मामला एक बार फिर फाइलों में उलझकर रह जाता है।
अमृत सरोवर पर 42.15 लाख खर्च का दावा
शिकायत में अमृत सरोवर निर्माण पर करीब 42.15 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य और उससे जुड़ी संरचनाओं का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। इसके अलावा गेबियन स्ट्रक्चर निर्माण पर करीब 4.80 लाख रुपये तथा 7.20 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च होने का उल्लेख करते हुए स्वीकृति, तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार मिनी परकुलेशन टैंक निर्माण में करीब 12.40 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। वहीं वर्ष 2019-20 में करीब 19 लाख रुपये की लागत से एक अन्य मिनी परकुलेशन टैंक निर्माण का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन कार्यों की स्वीकृति, भुगतान और वर्तमान भौतिक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है। इसके साथ ही नाले सहित अन्य स्थानों पर बनाए गए चेकडैम भी जांच के दायरे में हैं। एक चेकडैम पर करीब 22 लाख रुपये खर्च होने का उल्लेख करते हुए उसकी उपयोगिता, निर्माण गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की गई है।
सड़क और स्वागत द्वार निर्माण भी सवालों के घेरे में
ग्राम पंचायत में स्वागत द्वार निर्माण पर करीब 4.80 लाख रुपये, सीसी सड़क निर्माण पर करीब 3 लाख रुपये तथा साठिया टोला में सीसी सड़क निर्माण पर करीब 1.60 लाख रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।शिकायत में गंभीर आरोप लगाया गया है कि कुछ निर्माण कार्यों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी बिल-वाउचर और अन्य दस्तावेजों के आधार पर शासकीय राशि का आहरण किया गया। शिकायतकर्ता ने सप्लायरों के बिल, भुगतान विवरण, मस्टर रोल और संबंधित अभिलेखों का मिलान कराने की मांग की है। इसके अलावा सरपंच, सचिव और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच के साथ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने संबंधी आरोपों की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
21 कार्य दिवस में रिपोर्ट, अब जवाबदेही तय होने का इंतजार
एसडीएम द्वारा दोबारा स्मरण पत्र जारी किए जाने के बाद अब जनपद पंचायत सीईओ की जवाबदेही पर निगाहें टिकी हैं। सवाल यह है कि जनसुनवाई में शिकायत पहुंचने और जांच के निर्देश दिए जाने के बाद भी अब तक विस्तृत जांच प्रतिवेदन क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया? क्या जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी या फिर शिकायत को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया?
फिलहाल एसडीएम ने 21 कार्य दिवस के भीतर स्पष्ट और बिंदुवार जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि जांच में निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति, स्वीकृत राशि, किए गए भुगतान और कथित फर्जी बिल-वाउचर की सच्चाई सामने आती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।









