डिंडौरी। बांधवगढ़ और कान्हा के जंगलों से बाघों की आवाजाही डिंडौरी के वन क्षेत्रों तक होने की संभावनाओं के बीच वन विभाग ने बाघों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए कैमरा ट्रैप सर्वे शुरू कर दिया है। अखिल भारतीय बाघ आकलन के तहत जिले के चार वन परिक्षेत्रों में 200 कैमरे लगाए जा रहे हैं। जंगलों को 100 ग्रिड में विभाजित कर कैमरों के माध्यम से बाघों सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाएगा। वन विभाग को 30 नवंबर तक डेटा एकत्र कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत देहरादून भेजना है।
चार वन परिक्षेत्रों में 100 ग्रिड, 200 कैमरों से होगी निगरानी
वन विभाग द्वारा पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, बजाग और दक्षिण समनापुर वन परिक्षेत्र में कैमरा ट्रैप सर्वे कराया जा रहा है। इसके लिए जंगलों को 100 ग्रिड में बांटा गया है, जहां कुल 200 कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों को वन्यजीवों के आवागमन वाले संभावित स्थानों पर लगाया जा रहा है, ताकि उनकी गतिविधियां स्वतः रिकॉर्ड हो सकें। बाघों के शरीर पर बनी धारियों के पैटर्न के आधार पर अलग-अलग बाघों की पहचान करने में मदद मिलती है। इससे उनकी मौजूदगी और विचरण वाले क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा।
मई में भी हुआ था सर्वे, तकनीकी गड़बड़ी से दोबारा लगाए जा रहे कैमरे
एसडीओ सुरेंद्र कुमार जाटव के अनुसार, इससे पहले मई माह में भी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन कुछ तकनीकी गड़बड़ियों के चलते दोबारा कैमरा ट्रैप सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई है। वर्तमान सर्वे में निर्धारित समय सीमा के भीतर डेटा जुटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 30 नवंबर तक कैमरों से प्राप्त तस्वीरों और अन्य जानकारियों को एकत्र कर रिपोर्ट देहरादून भेजी जाएगी।
बांधवगढ़, कान्हा और अचानकमार से जुड़ा है वन क्षेत्र
डिंडौरी के जंगलों की भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जिले के डिंडौरी और शहपुरा वन परिक्षेत्र बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के वन क्षेत्रों से जुड़े हैं। वहीं दक्षिण समनापुर का जंगल कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्र से संपर्क रखता है। बजाग और करंजिया के जंगलों का जुड़ाव छत्तीसगढ़ के अचानकमार वन्यजीव क्षेत्र से बताया जाता है। इन वन क्षेत्रों के बीच प्राकृतिक संपर्क होने से बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में विचरण की संभावनाएं बनी रहती हैं। हालांकि, बाघों की वास्तविक मौजूदगी और संख्या की पुष्टि कैमरा ट्रैप से प्राप्त तस्वीरों के वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद ही होगी।
बाघों के साथ तेंदुआ, भालू और बायसन की गतिविधियां भी होंगी रिकॉर्ड
कैमरा ट्रैप सर्वे का लाभ केवल बाघों की गणना तक सीमित नहीं रहेगा। जिले के जंगलों में पाए जाने वाले तेंदुआ, भालू, हिरण, सियार और बायसन सहित अन्य वन्यजीवों की गतिविधियां भी कैमरों में दर्ज होंगी। इससे वन विभाग को वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, विचरण क्षेत्रों और उनकी सक्रियता की जानकारी मिलेगी। फिलहाल विभाग का लक्ष्य 30 नवंबर तक सभी कैमरों से डेटा एकत्र कर रिपोर्ट भेजना है। इसके बाद तस्वीरों के विश्लेषण से जिले के जंगलों में बाघों की मौजूदगी और उनकी आवाजाही को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।










