डिंडौरी।कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाने के लिए सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) पंचायत पहल के क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा प्रारंभ की गई इस पहल का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति उत्तरदायी बनाना तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सामुदायिक सहभागिता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।
सुमन पंचायत पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सुरक्षित मातृत्व आश्वासन के अंतर्गत उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक समय पर पहुंचे। इसके साथ ही मातृ मृत्यु, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु तथा खसरा एवं रूबेला के प्रकरणों में कमी लाने के लिए ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी एवं जनजागरूकता को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इन मापदण्डों पर होगा पंचायतों का चयन
सुमन पंचायत पुरस्कार के लिए कैलेंडर वर्ष 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक की अवधि के निर्धारित मापदण्डों के आधार पर पंचायतों का चयन किया जाएगा। इसके अंतर्गत शून्य मातृ मृत्यु, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की शून्य मृत्यु तथा खसरा एवं रूबेला के शून्य प्रकरण वाली पंचायतें पात्र होंगी। निर्धारित मापदण्डों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली पात्र पंचायतों को राज्य स्तर पर प्रमाण-पत्र एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विकासखंडों एवं जिलों को भी सम्मानित किया जाएगा।
पंचायत को एक लाख और उत्कृष्ट विकासखंड एवं जिले को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि
योजना के अंतर्गत पात्र पंचायत को राज्य स्तर पर प्रमाण-पत्र के साथ एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप सर्वाधिक पात्र सुमन पंचायतों वाले उत्कृष्ट विकासखंड को 50 हजार रुपये तथा सर्वाधिक पात्र पंचायतों वाले उत्कृष्ट जिले को भी 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस राशि का उपयोग शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन सुविधाओं एवं सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों को सुदृढ़ करने में किया जाएगा।
तीन स्तरों पर होगा सत्यापन
सुमन पंचायत पुरस्कार के लिए पात्र पंचायतों के चयन की प्रक्रिया त्रिस्तरीय सत्यापन के आधार पर होगी। प्रथम स्तर पर ग्राम सचिव एवं सरपंच द्वारा विगत एक वर्ष में शून्य मातृ मृत्यु, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की शून्य मृत्यु तथा खसरा एवं रूबेला के शून्य प्रकरण संबंधी जानकारी निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत की जाएगी।
द्वितीय स्तर पर विकासखंड चिकित्सा अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत द्वारा प्राप्त जानकारी का परीक्षण एवं सत्यापन किया जाएगा। इसके पश्चात जिला स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं कलेक्टर द्वारा अंतिम सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला कलेक्टर की अनुशंसा एवं स्वीकृति के उपरांत ही पात्र पंचायतों, विकासखंडों एवं जिलों को राज्य स्तर पर प्रमाण-पत्र एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
पात्र पंचायतों के आवेदन समय-सीमा में कराएं सुनिश्चित
जिला प्रशासन द्वारा मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुमन पंचायत पहल के निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने तथा पात्र पंचायतों के आवेदन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर आवश्यक जानकारी संकलित करने एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन प्रस्तुत कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक ग्राम पंचायतें इस पहल के अंतर्गत पात्र बन सकें। इसका उद्देश्य जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाना है।







