डिंडौरी।गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना को कथित कमाई का जरिया बनाने का सनसनीखेज मामला शहपुरा में सामने आया है। निःशुल्क उपचार के नाम पर मरीजों को जबलपुर के सुखसागर अस्पताल ले जा रही बस और एक प्रचार वाहन को एसडीएम ने रोककर जांच के लिए शहपुरा थाने पहुंचाया। प्रशासन की इस कार्रवाई से पूरे मामले में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, शहपुरा के भामा पिपरिया से मरीजों को लेकर जबलपुर जा रही बस की जांच के दौरान 14 मरीज, चार अटेंडर और चार कथित दलाल मिले। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि मरीजों को मुफ्त इलाज का भरोसा दिलाकर उनके आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मनमाने तरीके से सरकारी राशि आहरित करने का खेल चल रहा था। यानी जिन गरीब मरीजों के लिए सरकार ने मुफ्त इलाज की व्यवस्था की, उन्हीं मरीजों के नाम पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।तहसीलदार के प्रतिवेदन के आधार पर शहपुरा थाने में संबंधित आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई जारी है। अब पुलिस इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
मरीजों को मोहरा बनाकर कौन कर रहा था सरकारी योजना से खिलवाड़?
इस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मरीजों को गांवों से जुटाकर जबलपुर ले जाने का पूरा नेटवर्क कौन संचालित कर रहा था? प्रचार वाहन के जरिए किस तरह मरीजों को आकर्षित किया जा रहा था? क्या इस पूरे खेल के पीछे अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका है? और सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर किन लोगों के संरक्षण में आयुष्मान योजना के नाम पर यह कथित खेल संचालित हो रहा था?यदि मरीजों के आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी उपचार या अनावश्यक क्लेम के जरिए राशि निकालने की कोशिश की जा रही थी, तो यह न केवल सरकारी धन के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि गरीब मरीजों के भरोसे के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है।
फिलहाल एसडीएम की कार्रवाई के बाद अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस कथित नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके तार जबलपुर के किस अस्पताल या अन्य लोगों से जुड़े हैं। जरूरत इस बात की है कि केवल मौके पर मिले लोगों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों तक पहुंचा जाए।








