डिण्डौरी। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और सरकार की कार्यप्रणाली को और अधिक जनोन्मुखी, जवाबदेह एवं परिणाम आधारित बनाने को लेकर अधिवक्ता सम्यक जैन ने भाजपा के प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब को 25-सूत्रीय सुझाव पत्र भेजा है। पत्र में संगठन और सरकार के स्तर पर कई व्यावहारिक बदलाव सुझाए गए हैं, जिनका उद्देश्य जमीनी स्तर पर जनता से सतत संवाद स्थापित करना और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना बताया गया है।
इवेंट से परिणाम की ओर बढ़े संगठन, जनसमस्याओं को मिले प्राथमिकता
सुझाव पत्र में विशेष रूप से इवेंट आधारित गतिविधियों से परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति की ओर बढ़ने पर जोर दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि कार्यक्रम, रैलियां, स्वागत समारोह, होर्डिंग और सोशल मीडिया गतिविधियां संगठनात्मक जीवन का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन यदि सक्रियता मुख्य रूप से इन्हीं तक सीमित दिखाई देने लगे और वार्ड, बूथ, ग्राम एवं मोहल्ले की वास्तविक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान न दिया जाए, तो इसका जनविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अधिवक्ता सम्यक जैन ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक कार्यक्रम को किसी जनसमस्या के समाधान, जनसंवाद, लाभार्थी तक योजना की पहुंच अथवा किसी ठोस जनहितकारी परिणाम से जोड़ा जाना चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रियता का मूल्यांकन केवल आयोजित कार्यक्रमों की संख्या से नहीं, बल्कि वर्षभर किए गए जनसंपर्क और वास्तविक जनसमस्याओं के समाधान में योगदान के आधार पर किया जाना चाहिए।
सुझाव पत्र में घोषणा नहीं, परिणाम को शासन का प्रमुख सिद्धांत बनाने, प्रत्येक जिले में नियमित जनसमस्या ऑडिट कराने, सीएम हेल्पलाइन को समाधान आधारित व्यवस्था बनाने, मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के नियमित मैदानी निरीक्षण, अधिकारियों के कार्य का मूल्यांकन परिणाम के आधार पर करने तथा सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र निगरानी जैसे सुझाव शामिल हैं।
इसके साथ ही छोटे शहरों और नगरीय निकायों की मूलभूत समस्याओं, भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की समयबद्ध जांच, स्थानांतरण एवं पदस्थापना में पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय तथा सरकारी योजनाओं के प्रचार में व्यक्ति के बजाय योजना एवं लाभार्थी को केंद्र में रखने पर भी जोर दिया गया है।
आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लिए अलग फील्ड गवर्नेंस मॉडल, रोजगार एवं कौशल की जिला-स्तरीय आवश्यकता का आकलन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का परिणाम आधारित मूल्यांकन, जल संरक्षण एवं पर्यावरण में जनभागीदारी तथा किसानों के लिए फसल से बाजार तक समन्वित व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया गया है।
कार्यक्रम कम नहीं, लेकिन कार्यक्रम के बाद परिणाम अवश्य
संगठनात्मक स्तर पर बूथ एवं जमीनी कार्यकर्ताओं से नियमित संवाद, गुटबाजी और व्यक्तिगत हितों से ऊपर संगठनात्मक हित को रखने तथा नकारात्मक अथवा आलोचनात्मक फीडबैक को दबाने के बजाय उसे सुधार का माध्यम बनाने की आवश्यकता बताई गई है।
पत्र के अंतिम हिस्से में आगामी 100 दिवस, एक वर्ष और वर्ष 2028 तक की स्पष्ट परिणाम-आधारित कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इसमें संगठन, सरकार, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की भूमिका स्पष्ट करते हुए नियमित समीक्षा की बात कही गई है।
सम्यक जैन ने कहा कि सुझाव पत्र का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था की आलोचना करना नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जिसमें व्यक्ति से अधिक संगठन, प्रचार से अधिक जनसेवा, घोषणा से अधिक परिणाम और पद से अधिक जवाबदेही” को प्राथमिकता मिले।सुझाव पत्र की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मध्यप्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा के संबंधित राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।









