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दम तोड़ने लगे जलाशय वर्षा नहीं हुई तो बनेगी जल संकट की स्थिति..अमृत सरोवर और जलाशय निर्माण में अनियमितताएं आई सामने,दो दर्जन अमृत सरोवरों की जांच जारी

Kashi Agrawal

डिंडौरी। मानसून के आने में हो रही देरी से नदी तालाब सूखने की कगार पर हैं, वहीं जिले में जल संसाधन और आरईएस विभाग से बनाये गए जलाशय और सरोवर रीत गये हैं। जिले में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद 101 अमृत सरोवरों की दुर्दशा ऐसी है कि बूंद भर पानी के लिए तरस रहे हैं। इनके निर्माण से जहां जल स्तर में बढोत्तरी और इनके उपयोग से फसलों की सिंचाई का भरोसा जताया जा रहा था। लेकिन ये सरोवर खुद ही प्यासे हैं, इनकी दुर्दशा संबंधित विभाग के तकनीकी अमला की कारगुजारियों का परिणाम माना जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान मानकों की अनदेखी करना, और स्थल चयन में मनमानी सहित जनपद स्तरीय तकनीकी अमला क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता को परखने में पूरी तरह नाकाम रहा, तथा निजी स्वार्थ साधने के फेर में निर्माण को अंजाम दिया गया है। निर्माण कार्य के दौरान जिले के जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए थे, तब जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को नकार दिया गया था, लेकिन अब निर्माण की पोल खुलने लगी है। आलम यह है कि अमृत सरोवर की गुणवत्ता और बूंद भर पानी नहीं होने के बाद जांच कार्रवाई की जा रही है। वहीं जल संसाधन विभाग द्वारा जिले में बांध और जलाशय सहित डायवर्सन का निर्माण कराया गया जिनकी उपयोगिता शून्य है। निर्माण कार्य के बाद से सिंचाई कार्य के लिए बनाई गई, संरचनाएं उपयोगहीन साबित हो रही हैं। बावजूद इसके इनके रख रखाव और नहर मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये आहरण किये जा चुके हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा जिले के सभी विकास खंडों में बनाई गई संरचनाओं का निर्माण कराया गया है, लेकिन संरचनाएं उद्देश्यहीन और अनुपयोगी साबित हो रही हैं। जल संसाधन विभाग के दावों के अनुसार 97 बांध, और जलाशय से खरीफ सीजन में 12764 हेक्टेयर और रवी सीजन में 28829 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित किया जा रहा है। मध्यम सिंचाई परियोजना से रबी सीजन में 36 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित किये जाने का लक्ष्य तय किया गया है। जबकि धरातल पर स्थिति इससे इतर है।

इन बांध जलाशयों से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने का दावा

बिलगांव मध्यम परियोजना से 9980 हेक्टेयर , डिंडौरी जलाशय से 97, रंहगी जलाशय से 121, रयपुरा जलाशय से 153, लाखों टैंक से 184 , जमुनिया है एनीकेट से 30, सारसताल जलाशय से 166 टिकरिया जलाशय से 140, घानामार जलाशय से 263, डांडविदयपुर जलाशय से 260, लमान टोला जलाशय से 127, धूर्रा जलाशय से 92, उदार जलाशय से 134, सिलघाटी जलाशय से 166, टिकरिया जलाशय से 385, नागदमन जलाशय से 425 , भरद्वारा जलाशय से 444, सारंगपुर पड़रिया जलाशय से 470 , चटूवा हाई लेवल टैंक से 176, गोपालपुर जलाशय से 550, रकरिया जलाशय से 350, गोरखपुर जलाशय से 995, गोयरा जलाशय से 310 भाबरखडी जलाशय से 435, पाकर बघरा जलाशय से 619,फतेहपुर जलाशय से 333, खजरी टोला जलाशय से 113, दनदना नाला जलाशय से 1950 , कुकर्रा जलाशय से 585 , मोहदा जलाशय से 336, पड़रिया जलाशय से 143 , नेवसा जलाशय से 236 , बरगांव जलाशय से 264, किकरिया जलाशय से 40, भाजी टोला एनीकेट से 405, बरगी जलाशय से 340, देवलपुर जलाशय से 77 केवलारी जिला से 141 सुंदरपुर डायवर्सन स्कीम से 720, कचनारी डायवर्सन स्कीम से 340, खम्ही डायवर्सन स्कीम से 590 ,रनगांव जलाशय से 206,पिंडरूखी डायवर्सन स्कीम से 512, सुनियामार जलाशय से 210, गीधा जलाशय से 61, बोंदर नाला एनिकट से 102, सुरसा टोला जलाशय से 111हेक्टेयर, लबैदा एनीकट से 142, ढोंढ जलाशय से 126, दुल्लोपुर जलाशय से 133 , तरच एनिकट से 685, करौंदा जलाशय से 125 हेक्टेयर, बिलाईखार जलाशय से 105, खरगहना जलाशय से 121, नीम टोला डायवर्सन स्कीम से 495, ग्वारा जलाशय से 295, लालपुर जलाशय से 123, रतना जलाशय से 127, करनाई नाला से 48, रामनगर जलाशय से 195, अमरपुर जलाशय से 154, बहेरा जलाशय से 85, बंजर टोला जलाशय से 125, बरगा टोला जलाशय से 425, पाखा टोला जलाशय से 40, धनवासी सालिड बियर से 325, भैंसवाही सालिड बियर 320, बांका टोला सालिड वियर 330, भापसा सालिड वियर 285, भगनवारा जलाशय 186, भाखा डायवर्सन स्कीम 875, मुरता जलाशय 357, खुड़िया डायवर्सन 728, संग्रामपुर एनीकेट 65, दलका बंदा जलाशय से 425, पड़रिया 481, उमरिया जलाशय 188, कूटदर जलाशय 218, बस्तरा जलाशय 200, कोडिया जलाशय 199, चैरा जलाशय 344, देवरी जलाशय 147, कोहानी देवरी जलाशय 91, धनगांव जलाशय 144, सराई 94, टिकरिया जलाशय 273, डोभी 194, राछो 112, कछारी 157, कहींजरा 105, बरगांव वियर 155, बड़झर 140, सरवाही 44, मोहरा पहारुआ 252, चंदवाही जलाशय 157, घुंडी सराई 162, सारस डोली जलाशय से 1515 हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने का दावा किया जा रहा है।

अमृत सरोवर भी हो रहे दिखावा साबित

जिले में 101 अमृत सरोवर का निर्माण किया गया है, लेकिन बुनियादी तौर पर इनकी उपयोगिता सवालों के घेरे में हैं। करोड़ों खर्च करने के बाद भी बंूद भर पानी नहीं है। आलम यह है कि इन सरोवरों में किसानों के द्वारा इनमें खेती करने तथा बच्चों द्वारा क्रिकेट खेलने तक के मामले सामने आ चुके हैैं। जिले के जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत रामगढ में दो अमृत सरोवर, आमगांव में एक, किसलपुरी, खितगांव, अलौनी, घेवरी, बहेरा, रमपुरी, जुनवानी, डुंगरिया, बिजौरी, और बरसिंघा में एक-एक अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया है। बजाग जनपद पंचायत अंतर्गत बोंदर, घोपतपुर, पंचगांव, लालपुर, पिंडरूखी, उफरी, बिझौंरी, विक्रमपुर, अंगई, मिढली, गिरवरपुर, दुल्लोपुर, में भी संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। डिंडौरी जनपद पंचायत अंतर्गत मुढियाखुर्द, दर्री मोहगांव, नारायणडीह, दुहनिया, सारसताल, घुसिया माल, सारंगपुर पडरिया, नेवसा, कैलवारा, पौंडी माल, सरहरी, देवरा, हिनौता, मेर माल, आनाखेडा, सरई माल, रैली, बरगई, भरवई, मुडकी, शामिल हैं। वहीं करंजिया जनपद पंचायत अंतर्गत पाण्डपुर, मटियारी, बरेंडा, मानिकपुर, बावली, बुंदेला, बिजौरी, लखनपुर, उफरी, जोगी ग्वारा, नारी ग्वारा, उमरिया, और ठाढपथरा हैं। जनपद पंचायत मेंहदवानी अंतर्गत भलवारा, डोभी, मेंहदवानी, चैबीसा, बुल्दा, खम्हरिया, पिंडरूखी, पिपरिया, भानपुर, बाहदुर, और चैबीसा इसी तरह जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत भालापुरी, पडरिया-3, देवलपुर, सरई माल, लदवानी, खम्हरिया, झामुल, समनापुर, फिटारी, बंजरा, दामी तितराही, अजगर, और अंडई शामिल हैं। जनपद पंचायत शहपुरा में बरखेडा, करनपुरा, पौंडी माल, धिरवनकला, गुरैया, बडझर, ढोढा, धनौली, में अमृत सरोवर निर्माण कार्य कराये गये हैं। इनमें से अधिकतर उपयोगहीन साबित हो रहे हैं। लगातार शिकायत के बाद दो दर्जन ऐसे अमृत सरोवर हैं, जिन पर गुणवत्ताहीन और स्थल चयन में लापरवाही के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच जारी है।

करोड़ों के बांध जलाशय सूखे, जिम्मेदार कौन

जिले में करोड़ों की लगात से कराए गए दर्जनों बांध गर्मी के आमद से पहले ही सूख जाते हैं जबकि बांधों की जल भराव क्षमता मिलियन क्यूबिक मीटर से भी अधिक है। वर्षा जल रोकना दूर की बात है, कई बांध और जलाशयों में जीवित नदी का पानी तक नहीं रुक रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण 7 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सुंदरपुर डायवर्सन स्कीम, खुड़िया डायवर्सन स्कीम, मुरता जलाशय, बरगी जलाशय, पड़रिया जलाशय, केवलारी जलाशय, अमरपुर जलाशय सहित दर्जनों बांध पूरी तरह सूख गए हैं। 2010 में अमरपुर जनपद अंतर्गत भगनवारा में 6 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए जलाशय की मुख्य बंड में दरार आने से अनुपयोगी साबित हो रहा है।

बांध और नहर मरम्मत के नाम पर करोडों जारी

जल संसाधन विभाग के अधीन सैकड़ों बांधो एवं नहरों की मरम्मत कार्यों के लिए अनुरक्षण मद में प्रतिवर्ष प्रत्येक जलाशय के नाम पर लाखों रुपए आवंटित किए जाते हैं, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ आवंटित राशि का बंदरबाट करने हेतु सिर्फ कागजी खानापूर्ति का खेल खेला जा रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा वर्ष 2021-22 में नहर सफाई एवं मरम्मत कार्य हेतु मनेरगा अंतर्गत 313 कार्यों के लिए 31 करोड़ 8 लाख रुपए जारी किया गया था, लेकिन अधिकारियों ने नियम प्रक्रिया को ताक में रखकर सिर्फ और सिर्फ फर्जी बिलो के जरिए राशि का बंटाढार कर दिया जिससे बांधो नहरों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालांकि विगत दिन कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्षन में शहपुरा अंतर्गत संचालित सिंचाई परियोजनाओं के स्लूस गेटों के सुधार एवं आवष्यक मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने की बात कही जा रही है। जिसमें सारस डोली जलाशय, डोभी जलाशय, संग्रामपुर एनीकट, राछो जलाशय, बस्तरा जलाशय सहित सरई जलाशय शामिल हैं।

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Kashi Agrawal
Kashi Agrawal

मैं काशी अग्रवाल हूँ, पिछले 17 वर्षों से मैं पेशेवर रूप से समाचार-आधारित सामग्री लिखने के लिए समर्पित हूँ। मीडिया भारत का महत्वपूर्ण अंग है,The Narmada Express इस अंग को और मजबूत बनाने के लिए सच को लेकर काम करता है हमारा उद्देश्य आप तक सिर्फ सच को समय पर पहुचाना है हम निडर और निष्पक्ष होकर काम करने मे विश्वास करते है The Narmada Express आमजन की समस्याओं को समाज के बीच प्रमुखता से रखता है।

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