डिंडौरी। जनपद पंचायत करंजिया के संकुल केंद्र गोरखपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व अतिथि शिक्षक मणिभूषण सूर्यवंशी ने मंगलवार की जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपनी शिकायत का शीघ्र निराकरण नहीं होने पर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की भी मांग की है।
2007 से दी सेवाएं, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
आवेदन में मणिभूषण सूर्यवंशी ने बताया कि वे शैक्षणिक सत्र 2007-08 से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोरखपुर में अतिथि शिक्षक के रूप में सेवाएं देते रहे हैं। उनका कहना है कि 21 जुलाई 2026 की जनसुनवाई में भी उन्होंने शिकायत की थी, जिसका निराकरण 6 अगस्त तक किए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कम अंक वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का आरोप
आवेदक का आरोप है कि चयनित अभ्यर्थी का स्कोर उनके मुकाबले कम होने के बावजूद उसे नियुक्ति दी गई। उनका दावा है कि उन्होंने हिंदी साहित्य विषय की चयन परीक्षा भी उत्तीर्ण की है और उनके अंक भी स्कोर कार्ड में शामिल हैं, फिर भी उन्हें नियुक्ति से वंचित कर दिया गया।
नियमों की अनदेखी कर भर्ती का आरोप
आवेदन में कहा गया है कि हिंदी साहित्य विषय के नियमित शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद नियमानुसार नया विज्ञापन जारी कर भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर नियुक्ति कर दी गई।
रिश्तेदारों और परिचितों को लाभ पहुंचाने का आरोप
पूर्व अतिथि शिक्षक ने पूर्व एवं वर्तमान संकुल प्राचार्यों पर आरोप लगाया है कि प्रभारी हेडमास्टरों से मिलीभगत कर संकुल अंतर्गत विद्यालयों में रिश्तेदारों और परिचितों को नियुक्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसके समर्थन में उनके पास साक्ष्य उपलब्ध हैं।
अयोग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का भी आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पूर्व वर्षों और वर्तमान सत्र में भी ऐसे अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी गई, जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता (बीएड/डीएड) नहीं थी।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
मणिभूषण सूर्यवंशी ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि उनकी शिकायत का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए।
> नोट: ये सभी आरोप आवेदक द्वारा जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में लगाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना और जांच के निष्कर्ष आना अभी शेष है।







