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सालभर में ही सूख गई ‘मां की बगिया’, कुछ दिन भी नहीं टिक पाए पौधे..योजना पर भारी पड़ी प्रशासनिक अनदेखी, 726 महिला हितग्राहियों का किया गया था चयन

Kashi Agrawal

डिंडौरी। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना डिंडौरी जिले में सवालों के घेरे में आ गई है। योजना के तहत लगाए गए फलदार पौधे सालभर भी नहीं टिक सके और कई स्थानों पर बगिया की जगह अब खरपतवार और सूखे पौधों के ठूंठ नजर आ रहे हैं। महिला हितग्राहियों का आरोप है कि उन्हें गर्मी के मौसम में सूखे और कमजोर पौधे उपलब्ध कराए गए, जिन्हें बचाना उनके लिए मुश्किल हो गया।

राज्य सरकार ने ग्रामीण महिलाओं के लिए 15 अगस्त 2025 से इस योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत जिले के सात विकासखंडों में 726 महिला हितग्राहियों का चयन किया गया। चयनित महिलाओं का मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों से जुड़ा होना अनिवार्य था। योजना के अंतर्गत हितग्राहियों की भूमि पर पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग और सिंचाई व्यवस्था किए जाने का प्रावधान था। वहीं पौधों की आपूर्ति जबलपुर की एक ही नर्सरी से कराई गई।

अप्रैल की गर्मी में लगाए पौधे, नहीं मिल पाया अनुकूल वातावरण

योजना की मैदानी स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल पौधारोपण के समय और पौधों की गुणवत्ता पर उठ रहा है। आरोप है कि अप्रैल की तेज गर्मी के दौरान पौधों की आपूर्ति की गई, जिससे पौधों को शुरुआती दौर में हीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। पर्याप्त सिंचाई और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में अधिकांश पौधे पनप नहीं सके।डिंडौरी विकासखंड के माधोपुर, अखड़ार, नारायणडीह सहित अन्य गांवों में योजना की स्थिति इसकी हकीकत बयां कर रही है। कई स्थानों पर पौधों के नाम पर केवल सूखे ठूंठ दिखाई दे रहे हैं।

बगिया की जगह उगी खरपतवार

जिन जमीनों पर फलदार पौधों की बगिया तैयार करने का दावा किया गया था, वहां अब खरपतवार का कब्जा है। कुछ स्थानों पर फेंसिंग और तार तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पौधे गायब हैं। कहीं-कहीं एक-दो सूखे पौधों के अवशेष योजना की असफलता की कहानी बयां कर रहे हैं।इससे योजना के क्रियान्वयन, पौधों की गुणवत्ता, पौधारोपण के समय और सिंचाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

योजना के क्रियान्वयन पर पहले ही जताई गई थी आपत्ति

जानकारी के अनुसार योजना के गलत समय पर क्रियान्वयन को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष रूदेश परस्ते ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने गर्मी के मौसम में पौधारोपण कराने तथा अमानक पौधों की आपूर्ति को लेकर विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद अप्रैल की गर्मी में हितग्राही महिलाओं को पौधे उपलब्ध कराए गए।अब पौधों के सूख जाने के बाद योजना की जिम्मेदारी और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिम्मेदारियां तय करने के बजाय पौधों के खराब होने का दोष हितग्राही महिलाओं पर डाला जा रहा है।

हितग्राही का दर्द—कुछ ही समय में सूख गए पौधे

गोमती बाई, अध्यक्ष, मां सरस्वती आजीविका स्व-सहायता समूह, माधोपुर के अनुसार, गर्मी के दिनों में सूखे पौधे दिए गए थे। उनका रोपण किया गया, लेकिन कुछ ही समय में पौधे पूरी तरह नष्ट हो गए।वहीं जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एनआरएलएम अर्पणा पांडे ने कहा कि पौधों की सिंचाई की जिम्मेदारी हितग्राही की है और उनकी जानकारी में व्यवस्था ठीक है। उन्होंने फोन पर बयान देने से इनकार करते हुए कार्यालय आकर बात करने की बात कही।

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Kashi Agrawal
Kashi Agrawal

मैं काशी अग्रवाल हूँ, पिछले 17 वर्षों से मैं पेशेवर रूप से समाचार-आधारित सामग्री लिखने के लिए समर्पित हूँ। मीडिया भारत का महत्वपूर्ण अंग है,The Narmada Express इस अंग को और मजबूत बनाने के लिए सच को लेकर काम करता है हमारा उद्देश्य आप तक सिर्फ सच को समय पर पहुचाना है हम निडर और निष्पक्ष होकर काम करने मे विश्वास करते है The Narmada Express आमजन की समस्याओं को समाज के बीच प्रमुखता से रखता है।

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