डिंडौरी। सावन माह के प्रथम सोमवार पर डिंडौरी जिले के प्रसिद्ध कुकर्रामठ ऋणमुक्तेश्वर महादेव धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित इस प्राचीन शिवधाम में तड़के सुबह से ही दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लग गईं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने मां नर्मदा से कांवड़ में जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए भगवान ऋणमुक्तेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि, ऋणमुक्ति तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की।सावन के पहले सोमवार पर मंदिर परिसर पूरे दिन ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और दूर-दराज़ के गांवों सहित अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
स्वामिभक्त श्वान की लोकगाथा आज भी आकर्षण का केंद्र
कुकर्रामठ ऋणमुक्तेश्वर धाम केवल अपनी धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक अनोखी लोकगाथा के कारण भी विशेष पहचान रखता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में एक व्यापारी ने अपना प्रिय श्वान एक साहूकार के पास गिरवी रख दिया था। बाद में उसी स्वामिभक्त श्वान ने चोरों से व्यापारी का धन वापस दिलाया, लेकिन गलतफहमी में व्यापारी ने अपने ही वफादार श्वान की हत्या कर दी। जब सच्चाई सामने आई तो पश्चाताप स्वरूप व्यापारी ने उसी स्थान पर श्वान की स्मृति में मंदिर का निर्माण कराया। इसी कारण इस स्थान का नाम कुकर्रामठ पड़ा, जहां ‘कुकर’ का अर्थ श्वान माना जाता है।
प्राचीन स्थापत्य भी है विशेष आकर्षण
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कल्चुरी काल में पांडवों ने एक ही रात में इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की अद्भुत स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था इसे डिंडौरी जिले के प्रमुख शिवधामों में स्थान दिलाती है। सावन माह में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।स्वामिभक्त श्वान की अनोखी लोकगाथा और प्राचीन स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है ऋणमुक्तेश्वर धाम श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन एवं मंदिर समिति ने सुरक्षा, पेयजल, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की, जिससे दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।









