एफआईआर, राशि की वसूली और स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग,एसडीएम कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में हुई शिकायत
डिंडौरी। शहपुरा नगर परिषद एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए एक विस्तृत शिकायत पत्र में नगर परिषद में 13 लाख 42 हजार 797 रुपये के कथित वित्तीय गबन, फर्जी खरीदी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि के भुगतान तथा प्रशासनिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायकर्ता पूर्व नप अध्यक्ष राजेश गुप्ता,पूर्व जिला पचायत अध्यक्ष क्रष्णा उरैती सहित अन्य के व्दारा शिकायत एसडीएम शहपुरा कार्यालय मे आयोजित जनसुनवाई में तहसीदार से की गई है साथ ही डाक के माध्यम से कलेक्टर डिंडौरी,, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन जबलपुर, आयुक्त नगरीय प्रशासन भोपाल तथा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को भेजी गई है, जिसमें पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।शिकायत में दावा किया गया है कि नगर परिषद द्वारा जैम पोर्टल के माध्यम से सफाई एवं केमिकल सामग्री की खरीदी दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान किया गया, जबकि संबंधित सामग्री का न तो मौके पर उपयोग हुआ और न ही नगर परिषद के स्टोर में उसका कोई भौतिक अस्तित्व मिला। शिकायतकर्ताओं ने इसे सुनियोजित वित्तीय गबन बताते हुए पूरे प्रकरण को संगठित भ्रष्टाचार करार दिया है।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों के आधार पर लगाए गए आरोप
शिकायत पत्र में कहा गया है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त बैंक भुगतान पत्रक, जैम अनुबंध, बिल, स्टोर निरीक्षण पंचनामा और अन्य आधिकारिक अभिलेखों के अध्ययन के बाद कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ। आरोप है कि भुगतान की पूरी प्रक्रिया सरकारी रिकॉर्ड में पूरी दिखाई गई, लेकिन सामग्री वास्तविक रूप से नगर परिषद को प्राप्त ही नहीं हुई।
स्टोर निरीक्षण में सामग्री नही मिलने का दावा
शिकायत के अनुसार केसोल रेड इंडिकेटर लोबा केमी,लार्विसाइड/कीटनाशक पाउडर,अनब्रांडेड फिनाल और टायलेट क्लीनिग पाउडर।इन चारों मदों में कुल रू 13,42,797 का भुगतान आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है शिकायत के अनुसार 10 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा नगर परिषद के स्टोर का आकस्मिक निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान स्टोर प्रभारी की मौजूदगी में किए गए भौतिक सत्यापन में भुगतान की गई सामग्री स्टोर में शून्य पाई गई। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि इसका आधिकारिक पंचनामा भी तैयार किया गया था, जो कथित फर्जी खरीदी की पुष्टि करता है।
कोविड के बाद कोई छिड़काव नहीं हुआ
शिकायत पत्र में सफाई कर्मचारियों एवं मैदानी अमले के कथित लिखित एवं मौखिक बयानों का भी हवाला दिया गया है। आरोप है कि कर्मचारियों ने बताया कि कोविड-19 के बाद नगर परिषद क्षेत्र के किसी भी वार्ड में संबंधित केमिकल, फिनाइल अथवा मच्छर मारने वाली दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि सामग्री खरीदी ही गई थी, तो उसका उपयोग कहां हुआ, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
फर्जी भौतिक सत्यापन और कूटरचित दस्तावेजों का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिना सामग्री प्राप्त हुए ही भौतिक सत्यापन प्रमाण-पत्र, सामग्री प्राप्ति प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर भुगतान जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने इसे भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आपराधिक कृत्य बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।शिकायत केवल केमिकल खरीदी तक सीमित नहीं है। इसमें आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद में अन्य सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों में भी कोटेशन प्रक्रिया में अनियमितताएं कर पसंदीदा फर्मों को लाभ पहुंचाया गया तथा गुणवत्ताहीन कार्यों के माध्यम से सरकारी धन की बर्बादी की गई।
आरोपियो के विरूध्द एफआईआर दर्ज करने की हुई मांग
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।नगर परिषद अध्यक्ष, तत्कालीन सीएमओ, स्टोर प्रभारी, लेखापाल, सत्यापन समिति के सदस्यों तथा संबंधित सप्लायर फर्म के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए।कथित गबन की 13.42 लाख की राशि दोषियों से भू-राजस्व की तरह वसूल की जाए।नगर परिषद के पिछले वर्षों की सभी खरीद और निर्माण कार्यों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।वही इस मामले में नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अरुण अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सामने चुनाव का समय है सारे आरोप निराधार है मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है









