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महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत समस्त प्रगतिरत कार्यों को 30 जून 2026 तक करना होगा पूर्ण – कलेक्टर

Kashi Agrawal

डिंडोरी।भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराये जाने के लिये एडवाइजरी जारी करते हुये निर्देशित किया है कि महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत समस्त प्रगतिरत कार्यों को 30 जून 2026 तक पूर्ण कराया जाए। कलेक्टर श्रीमति अंजु पवन भदौरिया ने बताया कि 24 फरवरी 2026 को भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जिला स्तरीय समिति का गठन करते हुये कार्यों को पूर्ण कराते हुये मनरेगा पोर्टल पर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र अपलोड करने के लिए 30 जून 2026 की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

कलेक्टर / जिला कार्यकम समन्वयक महात्मा गांधी नरेगा को जिला स्तरीय समिति में अध्यक्ष का दायित्व सौंपा जाकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत / अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक महात्मा गांधी नरेगा को समन्वयक का दायित्व के साथ वनमण्डलाधिकारी सामान्य वनमण्डल डिण्डौरी को वृक्षारोपण कार्यों के लिये समिति में सदस्य का दायित्व, उपसंचालक उ‌द्यानिकी अधिकारी बागवानी कार्यों के लिये समिति मे सदस्य होंगे, लेखाधिकारी जिला पंचायत, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, परियोजना अधिकारी महात्मा गांधी नरेगा जिला पंचायत और मुख्य कार्यपालन अधिकारी सह कार्यक्रम अधिकारी नरेगा समिति में सदस्य होंगें। जिला स्तरीय समिति द्वारा ग्राम सभा में अनुमोदन तथा जनपद स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक अधिकारी के निरीक्षण एवं जनपद स्तरीय अनुशंसा के आधार पर कार्यों को Close करने हेतु तैयार सूची को अंतिम रूप देना। जनपद / जिला स्तरीय न्यूनतम एक तकनीकी एवं न्यूनतम एक प्रशासकीय अमले द्वारा वित्तीय नियमों के पालन के संबंध में निरीक्षण सुनिश्चित कराना। समिति के प्रत्येक सदस्य द्वारा समीक्षा के बाद बंद किए जाने वाले पस्तावित कार्यों का 10% या 25 कार्य (जो भी कम हो) का निरीक्षण किया जाए, जिसमें सभी ब्लॉक शामिल हो विशेषकर उच्च लागत वाले कार्य, जिससे वित्तीय नियमों के पालन का परीक्षण हो सके। निरीक्षण के दौरान जियो टैग छायाचित्र लिए जाए और उन्हें दस्तावेजीकरण और पारदर्शिता के लिए NREGASoft में अपलोड किए जाए। सत्यापन व समीक्षा के बाद बंद किए जाने वाले कार्यों के कार्य-वार पस्ताव स्वीकृत या अस्वीकृत किए जाए। यदि कार्य की समीक्षा के बाद बंद किए जाने के लिए अनुपयुक्त पाए जाते हैं तो सबंधिती के विरुद्ध वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाए। समिति द्वारा कार्य-चार समीक्षा उपरांत बंद किए जाने वाले स्वीकृत कार्यों संबंधी दस्तावेजों को डीपीसी एडमिन लोगिन के माध्यम से एमआईएस में अपलोड कराए जाए। आयुक्त, परिषद द्वारा आयुक्त लॉगिन के माध्यम से जिले ‌द्वारा बंद करने हेतु प्रस्तावित किए गए कार्यों की स्वीकृति प्रदान की जाएगी, उक्त स्वीकृति उपरांत ही कार्यों को बंद कराया जा सकेगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कार्य, जिन्हें प्राक्कलन में संशोधन उपरांत भी पूरा नहीं किया जा सकता हो। प्रगतिरत सस्पेण्डेट कार्य जो बाद में स्थानीय विधिक कारणों से अव्यवहार्य हो गए हैं। आपवादिक निम्न परिस्थितियों में मनरेगा के दिशा-निर्देशों में कार्यों को बंद किया जा सकेगा।

लेखापरीक्षा और उचित औचित्य के लिए दस्तावेज और सत्यापन के रिकॉर्ड रखे जाएं। कार्यों को बंद करने के लिए प्रस्तावित सभी कार्यों को समिति को प्रस्तुत करने से पहले 100% कार्यस्थल निरीक्षण किया जाए। यह निरीक्षण ब्लॉक स्तर पर सहायक यंत्री/उपयंत्री और एपीओ ‌द्वारा किया जाए और ग्राम सभा से विधिवत अनुमोदित कराया जाए। निरीक्षण के दौरान जियो-टैग सहित छायाचित्र लिए जाएं और नरेगा सॉफ्ट में अपलोड किए जाए। दस्तावेजीकरण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीणों के पंचनामा और ग्राम सभा प्रस्ताव को भी नरेगा सॉफ्ट में अपलोड किया जाए।

बिना भुगतान वाले बिल एवं मास्टर रोल को हटाना

पिछले वर्षों के बकाया बिल /मस्टर रोल / आंशिक ट्रान्जिक्शन को, जिनका भुगतान नहीं किया जाना है. उन्हें डिलीट करना है। पिछले सालों के पेडिंग पेज/मटेरियल लिस्ट को डिलीट करना जिनका भुगतान नहीं किया जाना है। सभी मदों के अंतर्गत विता हस्ताक्षर वाले FTOS को हटाना। मजदूरी, सामग्री, स्किल्ड और सेमी स्किल्ड मद के रिजेक्टेड ट्रान्जिक्शन को “Not to be paid” की श्रेणी में मार्क करना। DPC एडमिन लॉगिन के तहत PO की रिपोर्ट के अनुसार पेंडिंग और अनपेड एन्ट्रीज के रिक्वेस्ट जिनका किसी बास कारण से पेमेन्ट नहीं किया जाना है ऐसी सभी रिक्वेस्ट को फायनल अपूवल के लिए कमिश्नर लॉगिन पर भेजना।

वसूली व जवाबदेही

अव्यवहार्य या अनुत्पादक कार्यों पर किए गए व्यय के संबंध में अधिकारियों/एजेंसी की जवाबदेही तय करते हुए संबंधितों से राशि वसूल की जाए। जहां जानबूझकर लापरवाही या गबन के कारण नुकसान हुआ हो, वहां वसूली सहित उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उपरोक्तानुसार प्रक्रियाओं के अनुसार एमआईएस में कार्य बंद किया जाए। उक्त प्रकरणों में वसूल की गई राशि नियमानुसार निर्धारित खातों में जमा करायी जाए।

प्लानर साफ्टवेयर पर कार्य पूर्णता की जानकारी

प्लानर साफ्टवेयर में प्रगतिरत कार्यों को पूर्ण करने की कार्ययोजना तैयार करने हेतु प्रावधान किया गया है। प्रावधान अनुसार ग्राम पंचायतवार प्रगतिरत कार्यों की जानकारी प्लानर साफ्टवेयर में उपलब्ध होगी। उक्त कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय स्थिति का आंकलन कर प्रगतिरत कार्यों में से कार्यवार परीक्षण करते हुए विलोपित किए जाने वाले कार्य, भौतिक रूप से पूर्ण किए जाने वाले कार्य तथा ऐसे कार्य जिनकी सीसी अपलोड करना है, प्लानर साफ्टवेयर में उक्त कार्यों के लक्षित दिनाक सहित कार्यवार विवरण दर्ज किया जाए। उक्तानुसार प्लानर साफ्टवेयर पर ग्राम पंचायत स्तर से तैयार कार्ययोजना का जनपद पंचायत स्तर पर परीक्षण उपरांत अनुमोदित कार्ययोजना को जिला स्तरीय समिति द्वारा परीक्षण व सत्यापन किया जाए। इस प्रकार जिला स्तरीय समिति से परीक्षण व सत्यापन की गयी कार्ययोजना प्लानर साफ्टवेयर के डेशबोर्ड पर उपलव्ध रहेगी, जिसमें माहवार कार्यपूर्णता कैलेण्डर तथा प्रगति का विवरण उपलब्ध रहेगा।परियोजना अधिकारी मनरेगा जिला पंचायत श्री प्रदीप कुमार शुक्ल ने बताया कि कार्यों पर व्यय अनुसार समय सीमा में पूर्णता हेतु शून्य व्यय वाले कार्य यदि कार्य अपारंभ हैं एवं व्यवहारिक नहीं है, उक्त कार्यों का कारण सहित प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत कर सक्षम स्वीकृति उपरांत NREGA Sofi में Closed अंकित किये जाए। शुन्य से 30% व्यय वाले कार्यों का तकनीकी साध्यता एवं परिणाममूलक विश्लेषण सहित भौतिक सत्यापन व परीक्षण किया जाए। यदि कार्य उपयोगी एवं पूर्ण करने योग्य हो तो स्वीकृत पाक्कलन अनुसार समय-सीमा से पूर्ण कराया जाए। कार्य की साध्यता न होने की स्थिति में यदि कार्य उपयोगी रहा है, तो जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा सहित नरेगा साफ्ट में Complete श्रेणी में अंकित किये जाने के पूर्व राज्य स्तर पर अनुशंसा हेतु प्रस्तावित किया जाए। यदि कार्य अव्यवहारिक अनुपयोगी हो तो जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा सहित नरेगा साफ्ट में Closed” श्रेणी में अंकित किये जाने के पूर्व राज्य स्तर पर अनुशंसा हेतु प्रस्तावित किया जाए। उक्त कार्यों को नरेगा साफ्ट में Complete” अथवा Closed” श्रेणी में प्रविष्टि करने से पूर्व यह सुनिचित किया जाए कि शत-प्रतिशत कार्यों का जनपद स्तरीय अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया गया हो, जियो टेग, छायाचित्र व पर्याप्त साक्ष्य सहित दस्तावेजीकरण किया गया हो. ग्रामसभा से संकल्प पारित किया गया हो, कार्यकम अधिकारी महात्मा गांधी नरेगा द्वारा जिला स्तरीय समिति के समक्ष अनुशंसा प्रेषित की गई हो, जिला स्तरीय समिति द्वारा निर्णय लिया गया हो, उक्त राज्य के विषय में राज्य स्तर से अनुशंसा की गई हो। यदि कार्यों के क्रियान्वयन में अनियमितता पाई जाती है, तो आवश्यक अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं संबंधित से वसूली की कार्यवाही की जाए। साथ ही 30% से अधिक व्यय वाले कार्य इस प्रकार के सभी प्रगतिरत कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। भौतिक सत्यापन के दौरान यदि कार्य व्यवहार्य और आवश्यक पाया जाता है, तो कार्य के प्राक्कलन व उचित प्रक्रिया के अनुसार समयब्द्ध तरीके से पूरा किया जाए तथा कार्य भौतिक रूप से पूरा होने के उपरांत नरेगा सॉफ्ट में प्रविष्टि की जाए। यदि कार्य को आगे निष्पादित करना अव्यवहार्य पाया जाता है, तो उचित प्रक्रिया के अनुसार I नरेगा साफ्ट में Complete” अथवा Closed” श्रेणी में प्रविष्टि हेतु चिन्हित किया जाए। ऐसे प्रकरणों में, उत्तरदायित्व की जांच की जाए और यदि आवश्यक हो, तो वसूली और अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। उपरोक्त तीनो श्रेणी (शून्य व्यय, शून्य से 30 प्रतिशत व्यय तथा 30 प्रतिशत से अधिक व्यय) के कार्यों को पूर्ण करते एवं बंद करने (Complete अथवा Closed) हेतु जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा कार्यों का 100 प्रतिशत निरीक्षण किया जावे। प्रत्येक कार्य की जियो टेग फोटोग्राफ्स एवं साक्ष्य सहित दस्तावेजीकरण करना होगा

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