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जिसने रिश्वत नहीं दी, उसका अनुबंध निरस्त, दीप स्व सहायता समूह के सदस्यों ने की शिकायत..समूह का अनुबंध संदिग्ध रूप से निरस्त किये जाने का लगाया आरोप

Kashi Agrawal

डिंडौरी। मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से कार्रवाई करने का मामला सामने आया है। नगर परिषद डिंडोरी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 15 स्थित प्राथमिक शाला झुरकी टोला में मध्यान्ह भोजन संचालन कर रहे दीप स्व सहायता समूह के विरुद्ध जिला पंचायत द्वारा जारी आदेश अब विवादों में घिर गया है। समूह की अध्यक्ष रामवती एवं रसोईया ममता बनवासी तथा द्रौपदी राठौर ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि तीन माह पूर्व हुए मात्र एक सामान्य निरीक्षण के आधार पर समूह के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर दी गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि तत्कालीन एमडीएम प्रभारी संगीता सोनी द्वारा जारी नोटिस का उत्तर उनकी मर्जी के अनुसार बदलवाया गया और उसके एवज में समूह से रिश्वत की मांग की गई। रिश्वत नहीं देने पर, आरोप के अनुसार, तीन महीने बाद नाटकीय ढंग से समूह का अनुबंध निरस्त कर दिया गया। वहीं, वर्तमान एमडीएम प्रभारी रामजीवन वर्मा पर भी आरोप है कि उन्होंने शासन के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार करते हुए वार्ड 15 के विद्यालय का प्रभार वार्ड 9 के समूह को सौंप दिया, जबकि नियमों के अनुसार अनुबंध समाप्त किए जाने की स्थिति में प्रभार संबंधित शाला प्रबंधन समिति या स्थानीय समिति समूह को दिया जाना चाहिए था। शिकायत में यह भी उल्लेखित है कि मध्य प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2020 में पारित आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि किसी भी समूह पर कार्रवाई करने से पहले त्रिस्तरीय समिति से प्रतिवेदन लेना और युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। मगर, शिकायतकर्ताओं के अनुसार, एमडीएम प्रभारी द्वारा सभी नियमों को नजरअंदाज करते हुए मनमानी की गई है। इतना ही नहीं, संगीता सोनी पर पूर्व में भी ग्राम पंचायत पड़रिया में कार्यरत समूह को अनियमित तरीके से हटाने और रसोइयों को पद से पृथक करने के गंभीर आरोप लगे हैं। दूसरी ओर जिले की अनेक शालाओं जैसे प्राथमिक शाला चकरार, प्राथमिक शाला पड़रिया कला में मध्यान्ह भोजन योजना में घोर अनियमितताएँ सामने आने के बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। स्थानीय जनों एवं समूह सदस्यों का कहना है कि एमडीएम प्रणाली में पहले से ही भ्रष्टाचार के मामले मीडिया में उजागर होते रहे हैं, और अब यह मामला पूरे कार्यक्रम के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि दोषी अधिकारी रामजीवन वर्मा एवं संगीता सोनी के विरुद्ध जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल पूरा मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

एमडीएम के प्रभार पर सवाल

एमडीएम प्रभारी रामजीवन वर्मा पर नौकरी प्राप्त करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग करने के आरोप लगे हैं, मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन कलेक्टर के निर्देष पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने संविदा अनुबंध नवीनीकरण पर रोक लगाते हुए पद से पृथक कर दिया गया था हालांकि आदेष को चुनौती देते हुए रामजीवन वर्मा ने न्यायालय की शरण ली थी जिस पर न्यायालय ने अगली सुनवाई तक कार्रवाई पर रोक लगाई है। बावजूद इसके प्रशासन द्वारा रामजीवन वर्मा को एमडीएम शाखा का प्रभार दिया गया जो जन चर्चा का विषय बना हुआ है।

इनका कहना है

शिकायत की जांच जारी है जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जावेगी।अंजू पवन भदौरिया, कलेक्टर

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