डिंडौरी।जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। जर्जर स्कूल भवन, शिक्षक विहीन शालाएँ और अन्य अव्यवस्थाओं की शिकायतें पालक और ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर की जाती रही हैं। लेकिन सुधार न होने की स्थिति में ग्रामीणों ने अपने बच्चों का भविष्य संवारने का बीड़ा खुद ही उठा लिया है।
किसलपुरी ग्राम पंचायत के पोषक ग्राम बनवासी टोला के ग्रामीणों ने प्रशासन की अनदेखी के बाद अपनी जेब से चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान कर नए स्कूल भवन का निर्माण शुरू कर दिया है।
🏚️ जर्जर भवन को किया गया जमींदोज
बनवासी टोला का पुराना स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका था। इस भवन में बच्चों को पढ़ाना खतरनाक साबित हो सकता था। करीब एक माह पहले प्रशासन ने उस भवन को तो तोड़ दिया, लेकिन नए भवन की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
📚 पढ़ाई पर पड़ा असर
भवन टूटने के बाद पहले तो बच्चों की पढ़ाई एक घर में कराई गई। बाद में उन्हें दो किलोमीटर दूर एक पुराने भवन में शिफ्ट किया गया, लेकिन उसकी हालत भी दयनीय थी। इससे करीब 65 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी।
🤝 ग्रामीणों की मिसाल
कई बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समाधान न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद जिम्मेदारी उठाई। हर परिवार से दो-दो हजार रुपये का चंदा एकत्र किया गया। महिलाएँ, युवा और बुजुर्ग सब मिलकर श्रमदान कर रहे हैं।
🌟 ईंट-पत्थर ही नहीं, भविष्य की नींव
ग्रामीणों की यह पहल सिर्फ़ ईंट-पत्थर का ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि यह बच्चों का भविष्य गढ़ने की जद्दोजहद है। समाज के लिए यह पहल एक प्रेरणा है कि इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास से किसी भी समस्या का समाधान संभव है।











