
डिण्डौरी- गौरततलब है कि जबसे शहपुरा जनपद में प्रभारी सीईओ के पद पर अरविद बोरकर की पदस्थापना हुई थी तभी से वे गुटबाजी को लेकर काफी विवादो मे रहे है वही शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भी अनेको बार उनकी विवादित कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चूके थे और क्षेत्र विकास के हित को ध्यान मे रखते हुए जल्द हटवाने की बात कही थी वही प्रभारी सीईओ के स्थानान्तरण पश्चात प्रभारी सीईओ को तत्कालीक तौर पर माननीय उच्च न्यायलय व्दारा 30दिवस हेतु स्थगन साथ ही सात दिवस के अंदर शासन को नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने निदेशित किया था उस अभ्यावेदन को शासन व्दारा व्दारा निराकरण करना था वही विभाग व्दारा प्रस्तुत अभ्यावेदन का निराकरण कर दिया गया और उनके व्दारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को अमान्य कर दिया गया अब प्रभारी सीईओ अरविद बोरकर को स्थानांतरित स्थान पर जाना होगा।

यह है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी अनुसार शहपुरा जनपद के प्रभारी सीईओ अरविन्द कुमार बोरकर के स्थानान्तरण याचिका पर मध्यप्रदेश पचायत एव ग्रामीण विकास विभाग ने आदेश जारी किया है जिसमें वर्णित है कि उनके जनपद पंचायत पलेरा जिला टीकमगढ़ किये गये स्थानांतरण के संबंध में याचिका क्रमांक 22640/25 दायर की थी। उक्त याचिका में दिनांक 27.06.25 को पारित आदेश का ऑपरेटिव अंश है कि उपर्युक्त पर विचार करते हुए, गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, वर्तमान याचिका इस निर्देश के साथ निस्तारित की जाती है कि यदि याचिकाकर्ता आज से 7 कार्यदिवसों के भीतर प्रतिवादी संख्या 1 के समक्ष इस आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ एक नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करता है, तो प्रतिवादी संख्या 1, कानून के अनुसार एक सुविचारित और सुस्पष्ट आदेश पारित करके, 3 सप्ताह की अतिरिक्त अवधि के भीतर उस पर निर्णय लेगा।30 दिनों की अवधि तक या याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक जो भी पहले हो याचिकाकर्ता को उसके वर्तमान पदस्थापन स्थान अर्थात शाहपुरा, जिला डिंडोरी में कार्य करते रहने की अनुमति दी जाएगी।यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि याचिकाकर्ता द्वारा इस आदेश के अनुसार 7 दिनों की अवधि के भीतर नया अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो यह आदेश पीठ को आगे संदर्भित किए बिना अपनी प्रभावकारिता खो देगा। तदनुसार, याचिका निस्तारित की जाती है।
विभाग ने प्रस्तुत अभ्यावेदन का किया निराकरण
प्रभारी सीईओ अरविद बोरकर व्दारा प्रस्तुत अभ्यावेदन के बिन्दु क्रमांक 1 एवं 2 के संबंध में लेख है कि वर्तमान पदस्थापना पर श्री बोरकर को 01 वर्ष 11 माह हो चुके है। स्थानांतरण नीति की कंडिका 17 एवं 18 के अनुरूप ही प्रशासकीय आधार पर स्थानांतरण किया गया है। इसलिए यह बिन्दु मान्य योग्य नहीं है।साथ श्री बोरकर द्वारा स्वयं के नागपुर में इलाज का हवाला दिया गया किन्तु वर्तमान पदस्थापना से नागपुर के समीपवर्ती जिलों में स्थानांतरण हेतु कोई आवेदन पत्र नहीं प्रस्तुत किया गया है। स्थानांतरित स्थान के समीप झासी एवं ग्वालियर में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं है। इसलिए अभ्योवदन का बिन्दु क्रमांक 3 मान्य योग्य नहीं है। श्री बोरकर द्वारा उनकी पत्नी शिक्षका है के संबंध में जानकारी विभाग को नहीं दी है एवं पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने का कोई आवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया है। पत्नी की सेवा को आधार नहीं बनाया जा सकता है इसलिए अभ्योवदन का बिन्दु क्रमांक 4 मान्य योग्य नहीं है।श्री बोरकर विकास खण्ड अधिकारी जनपद पंचायत शहपुरा जिला डिण्डौरी में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में दिनांक 13.09.23 से पदस्थ है। श्री बोरकर को प्रशासकीय आधार पर विभागीय आदेश क्रमांक 768 दिनांक 17.06.25 द्वारा जनपद पंचायत पलेरा जिला टीकमगढ़ में पदस्थ किया गया है।श्री बोरकर द्वारा चाही गई जनपद पंचायत धनौरा एवं घंसौर में पद रिक्त नहीं है अतः पद रिक्त न होने से उनका अनुरोध स्वीकार योग्य नहीं है।श्री बोरकर जनपद पंचायत शहपुरा जिला डिंडौरी में दिनांक 13.09.23 से प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में 01 वर्ष 11 माह से पदस्थ है।श्री बोरकर को दिनांक 30.07.2025 को समक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। समक्ष सुनवाई में श्री बोरकर ने अभ्यावेदन में उल्लेखित तथ्यों को ही दोहराया है। श्री बोरकर को स्थानांतरण नीति 2025 की कंडिका 17 एवं 18 अनुरूप ही प्रशासकीय आधार पर स्थानांतरित किया गया है।अतः राज्य शासन एतद द्वारा श्री बोरकर का अभ्यावेदन अमान्य करता है।
