डिंडोरी। एक ओर जहां मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी के किसान भूख हड़ताल के साथ नए वर्ष का स्वागत करने को मजबूर हैं। यह विरोधाभास सरकार की कथनी और करनी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ज्ञात हो कि भारतीय किसान संघ जिला डिंडोरी के बैनर तले जिले के हजारों किसान अपनी मूलभूत समस्याओं—बिजली, पानी, खाद एवं बीज—को लेकर 29 दिसंबर 2025 से वीरांगना रानी दुर्गावती स्टेडियम, शाहपुरा में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। किसानों ने पहले विशाल रैली निकालकर अपनी मांगें रखीं, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते आंदोलन लगातार तेज होता गया।
हड़ताल के चौथे दिवस, 1 जनवरी 2026 से किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी है। नए वर्ष के पहले ही दिन अन्नदाता का भूखे पेट धरने पर बैठना, सरकार की किसान हितैषी नीतियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस संबंध में तहसील मंत्री यतेन्द्र कुमार साहू ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “किसान पस्त है और सरकार मस्त। भूख हड़ताल पर बैठे किसानों की सरकार को कोई चिंता नहीं है। यदि शीघ्र ही मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा।”
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर लिखित और समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।











