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जनजाति कल्याण केंद्र बरगांव में  दोना पत्तल निर्माण एवं महिला ड्राइविंग प्रशिक्षण का हुआ शुभारंभ

Kashi Agrawal

डिंडोरी।जनजाति कल्याण केंद्र महाकोशल बरगांव मैं आज महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं के समूह के द्वारा संचालित होने वाले दोना पत्तल संस्करण इकाई का भव्य शुभारंभ किया गया इसमें जनजातीय क्षेत्र में रहने वाली आदिवासी महिलाओं के द्वारा कल्याण केंद्र प्रकल्प के द्वारा लगाई गई मशीन से दोना पत्तल निर्माण कार्य किया जाएगा आदिवासी अंचल में महलोन पत्ता बहुतायत मात्रा में पाया जाता है जो बाहर शहरों में निर्यात होता था अब यहां पर दोना पत्तल संस्करण इकाई स्थापित होने पर यहीं पर प्राकृतिक हरे पत्तों से दोना पत्तल निर्माण कार्य किया जाएगा दोना पत्तल संस्करण इकाई की स्थापना से यहां पर स्थानीय आदिवासी वनांचल में रहने वाली महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त होगा।

रानी दुर्गावती ड्राइविंग स्कूल का हुआ शुभारंभ

जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बड़गांव में रानी दुर्गावती ड्राइविंग स्कूल के नवीन सत्र का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले की उपस्थिति एवं मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेश मेहरा के विशिष्ट आतिथ्य में किया गया पूर्व में भी यहां पर संचालित ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूल में 400 से अधिक महिला पुरुषों को ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है वर्तमान में सैकड़ो की संख्याओं में महिलाओं ने प्रशिक्षण हेतु आवेदन दिया है जिन्हें अब ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाएगा

पंचकर्म आयुर्वेदा का भी हुआ शुभारंभ

जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव स्थित स्वास्थ्य केंद्र में आयुर्वेद पंचकर्म कार्यशाला का शुभारंभ किया गया यह डिंडोरी जिले के लिए एक विशेष उपलब्धि है अभी डिंडोरी एवं आसपास के जिले में भी इस तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं थी कल्याण केंद्र बरगांव में अब आयुर्वेद पद्धति से पंचकर्म अनुसंधान कार्यक्रम का आयोजन प्रारंभ कर दिया गया है पंचकर्म पद्धति से यहां पर मरीजों का इलाज किया जाएगा आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग इस कार्य में किया जाता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले ने बताया कि जनजाति कल्याण केंद्र में आयुर्वेद पंचकर्म का शुभारंभ का उद्देश्य देश को पुनः आयुर्वेद की ओर ले जाना हमारी भारतीय संस्कृति में आयुर्वेद का अत्यधिक महत्व है परंतु एलोपैथी के युग मैं लोग आयुर्वेद को भूलते जा रहे हैं और एलोपैथी दावों पर निर्भर हो गए हैं परंतु अब हमें होना अपनी भारतीयम मूल संस्कृति मैं वापस लौटना है आयुर्वेद को बढ़ावा देना है

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