
डिंडौरी। जिले में मनरेगा उपयंत्रियों ने अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर अब आरपार की लड़ाई छेड़ दी है। दस दिवसीय सामूहिक अवकाश के बाद भी जब शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो सोमवार से उपयंत्रियों ने अनिश्चितकालीन कलमबंद आंदोलन शुरू कर दिया। इस संबंध में मनरेगा अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।

अभियंता संघ का कहना है कि उपयंत्री वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा अब तक सिर्फ आश्वासन दिए गए, समाधान नहीं। ऐसी स्थिति में उपयंत्री लगातार शोषण के शिकार हो रहे हैं और मानसिक अवसाद में पहुंच गए हैं।

उपयंत्रियों की प्रमुख मांगें
संविदा पारिश्रमिक को नियमित उपयंत्री के वेतन के बराबर किया जाए तथा वार्षिक वेतनवृद्धि मिले।
उपयंत्री की मृत्यु पर आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
पद से पृथक करने की जगह निलंबन की कार्यवाही हो।
आरईएस व मनरेगा उपयंत्रियों की संयुक्त वरिष्ठता सूची अनुसार सहायक यंत्री का प्रभार दिया जाए।
नियमित कर्मचारियों की तरह उपादन (ग्रेच्युटी) का भुगतान हो और 1 अगस्त 2023 के बाद मृत या सेवानिवृत्त उपयंत्रियों को भी इसका लाभ मिले।
संविदा सेवा का नवीनीकरण 1 वर्ष नहीं बल्कि 5 वर्ष की सीआर के आधार पर किया जाए।
उपयंत्रियों से केवल तकनीकी कार्य ही लिया जाए।
हर माह की पहली तारीख को समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
सरपंच संघ ने जताया समर्थन…उपयंत्रियों की इस लड़ाई को जिला सरपंच संघ का भी समर्थन मिल गया है। सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष फूल सिंह मरकाम ने मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि जब तक उपयंत्रियों की मांगों का निराकरण नहीं होता, तब तक जिले की सभी पंचायतों में मनरेगा के कार्य बंद रहेंगे।
👉 आंदोलनरत उपयंत्रियों और सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
