डिंडोरी। जिले में विभिन्न शासकीय योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार बैठकों का दौर जारी है। समय-समय पर विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्यालयों में बैठकें आयोजित कर योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाता है, और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाते हैं। हालांकि इन बैठकों और कागजी समीक्षाओं के बावजूद कई योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अधिकांश अधिकारी कार्यालयों में बैठकर योजनाओं की समीक्षा करने तक ही सीमित नजर आते हैं। बैठक के दौरान प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है, योजनाओं की उपलब्धियां गिनाई जाती हैं और संबंधित विभागों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए जाते हैं। बैठक समाप्त होने के बाद इन गतिविधियों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अगले ही दिन इन बैठकों से जुड़ी खबरें स्थानीय अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा की जाती हैं, जिससे यह संदेश देने की कोशिश होती है कि प्रशासन विकास कार्यों को लेकर बेहद सक्रिय है। लेकिन जमीनी स्तर की स्थिति कुछ अलग ही कहानी बयां करती है। कई स्थानों पर विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, तो कहीं योजनाओं का क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, स्वच्छता, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई कार्य लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बैठकों में भले ही योजनाओं की प्रगति का दावा किया जाता हो, लेकिन वास्तविकता में कई समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
यदि विभागवार स्थिति पर नजर डालें तो कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से छिंदगांव बांध परियोजना पर कार्य किया जा रहा है, जबकि यह क्षेत्र राघवपुर परियोजना के डूब क्षेत्र में आता है। इस विषय पर समीक्षा बैठकें भी हुई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई या स्पष्टता सामने नहीं आई है। इससे योजना की उपयोगिता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं जिला चिकित्सालय की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। आए दिन यह शिकायत सामने आती है कि चिकित्सक अपनी सुविधा अनुसार अस्पताल पहुंचते हैं या कई बार ड्यूटी डॉक्टर समय पर उपस्थित नहीं रहते। ऐसे मामलों में आकस्मिक परिस्थितियों में आने वाले मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और गंभीर परिणाम तक सामने आ जाते हैं। समय-समय पर औचक निरीक्षण भी किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
डिंडोरी और शहपुरा नगर परिषद क्षेत्र के वार्डों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। कई वार्डों में सड़क, नाली और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। नागरिकों का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, बैठकें भी हुईं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आती। इसी प्रकार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा नल-जल योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। योजना का उद्देश्य हर घर तक पानी पहुंचाना था, लेकिन कई क्षेत्रों में आज भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। विडंबना यह है कि अंततः एक आदेश जारी कर यह कह दिया जाता है कि जिला सूखा ग्रस्त या सूखा गृहित है, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। जिले के विभिन्न विभागों में अनियमितताओं और व्यवस्थागत कमियों की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद जिला मुख्यालय में कलेक्टर सभाकक्ष में विभागों की समीक्षा बैठकों का सिलसिला जारी रहता है। प्रभारी मंत्री के दौरे के दौरान भी विकास कार्यों को लेकर चर्चा होती है और आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन अक्सर यह प्रक्रिया औपचारिकता तक ही सीमित दिखाई देती है। बैठक के बाद अगले दिन अखबारों में समाचार प्रकाशित हो जाता है, तस्वीरें भी सामने आ जाती हैं, और विकास की समीक्षा का संदेश जनता तक पहुंचा दिया जाता है। लेकिन आम लोगों का कहना है कि इन बैठकों का असर जमीनी स्तर पर बहुत कम दिखाई देता है। लोगों का यह भी कहना है कि जहां एक ओर विभागों के प्रमुख अधिकारी सभा कक्ष में बैठकर समीक्षा बैठकों के दौरान चाय-नाश्ते के साथ योजनाओं पर चर्चा करते नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। ऐसे में अब जरूरत इस बात की महसूस की जा रही है कि प्रशासनिक बैठकों के साथ-साथ वास्तविक कार्यों की प्रगति पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाए। यदि अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रीय निरीक्षण करें, शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें और योजनाओं की निगरानी सीधे जमीनी स्तर पर करें, तभी विकास कार्यों का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सकेगा और प्रशासन पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
इनका कहना है
बैठकों और रिपोर्टों से विकास संभव नहीं है, प्रशासन को चाहिये कि योजनाओं की जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी कर जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करना चाहिये।सम्यक जैन, अधिवक्ता ’
प्रभारी मंत्री का आगमन हो रहा है इस बावद उनसे चर्चा की जायेगी।चमरू सिंह नेताम, जिला अध्यक्ष भाजपा
ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं। जल जीवन मिशन जिले में फ्लॉप साबित हो रही है, ग्रामीणों को जल संकट से जूझना पड रहा है। हर रोज समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन निराकरण क्या हो रहा है। समस्या जस की तस बनी हुई हैं।ओमकार मरकाम, विधायक डिंडौरी










