डिंडोरी।प्रदेश सरकार द्वारा जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” में बड़े स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भागीदारी दिखाई दे रही है, लेकिन डिंडोरी जिले में यह अभियान जमीनी स्तर पर महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष भी जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिमा बागरी इस अभियान में शामिल हुई थीं। उस दौरान शहपुरा के युवाओं ने कलेक्टर के माध्यम से मालपुर स्थित मां नर्मदा तट की बदहाल स्थिति से अवगत कराया था। युवाओं ने बताया था कि यह तट जिले का एकमात्र संगम स्थल है, जहां हर वर्ष 10 दिनों का विशाल मेला आयोजित होता है और शहपुरा सहित उमरिया जिले के हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
इसके बावजूद मालपुर नर्मदा तट के हालात आज भी नहीं सुधरे हैं। मुख्य घाट पूरी तरह मलबे से पटा हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घाट पर बने रपटा पुल में लगे गेट भी गायब हो चुके हैं, वहीं जल स्तर लगातार घटता जा रहा है, जिससे घाट सूखने की कगार पर पहुंच गया है।
बताया जाता है कि पिछले वर्ष प्रभारी मंत्री ने जल्द सुधार कार्य कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वर्तमान हालात को देखते हुए स्थानीय युवाओं और श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो आने वाले समय में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब अभियान के नाम पर केवल कार्यक्रम और श्रमदान ही हो रहा है, तो जमीनी स्तर पर स्थायी सुधार कब होगा।










