डिंडौरी। जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत बनाए जा रहे 24 अमृत सरोवरों के निर्माण में विफलता सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। यह कार्रवाई ग्रामीण यांत्रिकी सेवा डिंडौरी के कार्यपालन यंत्री द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
जानकारी के अनुसार जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा पूर्व में 24 अप्रैल 2025 को एक जांच समिति गठित की गई थी, लेकिन उक्त समिति द्वारा निर्धारित समय में प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी कारण कलेक्टर ने पूर्व समिति को निरस्त करते हुए नई जांच समिति का गठन किया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में जांच दल को 7 दिवस के भीतर विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच समिति में शामिल अधिकारी
नारायण देशमुख, अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन विभाग, डिंडौरी,प्रदीप शुक्ला, परियोजना अधिकारी, मनरेगा, जिला पंचायत डिंडौरी,स्टीफन एक्का, परियोजना अधिकारी, वाटरशेड, जिला पंचायत डिंडौरी
जांच समिति को निर्देशित किया गया है कि वे अमृत सरोवर निर्माण से जुड़े सभी संबंधित दस्तावेज, तकनीकी विवरण एवं प्रगति रिपोर्ट का परीक्षण करें। साथ ही जनपद पंचायत अमरपुर, बजाग, डिंडौरी, करंजिया, सगनापुर एवं शहपुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से आवश्यक सहयोग लेने के भी निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम अमृत सरोवर योजना की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले में पेयजल संकट को दूर करने के लिए अमृत सरोवर योजना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजरें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण में विफलता के लिए जिम्मेदार कौन है।










