डिंडौरी।जिले की नगर परिषद शहपुरा में मुरुम एवं डस्ट बिछाने के नाम पर लाखों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। स्थानीय नागरिक द्वारा जिलास्तरीय जनसुनवाई में दिए गए शिकायत पत्र में नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अरूण अग्रवाल,तत्कालीन प्रभारी सीएमओ , उपयंत्री,लेखापाल तथा तीन सप्लायरों की मिलीभगत से फर्जी भुगतान किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।वही प्राप्त जानकारी अनुसार जनसुनवाई मे प्राप्त शिकायत के बाद कलेक्टर डिण्डौरी ने एसडीएम को मामले के निराकरण की जवाबदारी सौपी है।शिकायतकर्ता के अनुसार, जनवरी 2025 से मार्च 2025 के बीच नगर परिषद द्वारा मरम्मत कार्यों के नाम पर लाखों का आहरण किया गया, लेकिन धरातल पर कहीं भी कार्य नहीं हुआ। इसके बावजूद न केवल फर्जी मापन पुस्तिका तैयार की गई बल्कि बिना बिल के भुगतान भी कर दिए गए।

तीन प्रकरण, एक ही पेटर्न
शिकायतकर्ता व्दारा दिये गये शिकायत पत्र में उल्लेखित है कि कामदगिरि इन्फ्रास्ट्रक्चर भोपाल को रूपये 94,221 का भुगतान किया गया जबकि संचालक ने स्वयं स्वीकारा कि कोई कार्य नहीं किया गया। मे. श्रीराम कंस्ट्रक्शन को रू 72,483 का भुगतान किया गया संचालक ने बताया कि उसने सिर्फ पर्चा दिया था, काम नहीं किया। महेश यादव नामक व्यक्ति को रू 73,901 का भुगतान किया गया बिना किसी वास्तविक निर्माण के, मुरुम व डस्ट बिछाने की फर्जी नस्ती बनाई गई।
नियमों को ताक पर रखा गया
शिकायत पत्र के अनुसार नप ने प्रस्तावों के लिए पार्षदों या आम जनता का कोई मांग पत्र संलग्न नही किया,कोटेशन प्रक्रिया में सभी कोटेशन एक ही हस्तलिपि से भरे गए एक ही पैन कार्ड पर बनाए गए।बिना सार्वजनिक सूचना व बिना पंचनामा के कार्य स्वीकृत व भुगतान किए गए।निविदाएं न तो समिति के समक्ष खोली गईं और न ही उसमें जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
सप्लायरों का कबूलनामा बना साक्ष्य
शिकायत में उल्लेख है कि सप्लायरों से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि न तो उन्होंने कोई कार्य किया और न ही भुगतान से उनका कोई लेना-देना है। वहीं एक ठेकेदार ने कहा कि उसका फर्म सिर्फ “पर्चे” के लिए इस्तेमाल हुआ है। कुछ ने खुलासा किया कि पार्षद या नगर परिषद के कर्मचारियों ने उनके नाम का दुरुपयोग किया।
जांच और कार्यवाही की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, निकाय की सभी फाइलों की ऑडिट भी करवाई जाए।वही शिकायत के बाद कलेक्टर ने एसडीएम को जांच सौपी है जांच के बाद ही सभी तथ्य सामने आ जावेगे।











