डिंडोरी।श्रावण मास के पावन अवसर पर कुकर्रामठ स्थित ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में आज श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जिला मुख्यालय से मात्र 17 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन मंदिर शिवभक्तों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
श्रावण सोमवार के अवसर पर भोर से ही श्रद्धालुओं की कतारें मंदिर परिसर में देखी गईं। स्थानीय ग्रामीणों से लेकर दूरस्थ जिलों – मंडला, जबलपुर, बालाघाट, शहडोल आदि से भी हजारों शिवभक्त भगवान ऋणमुक्तेश्वर महादेव के दर्शन हेतु पहुँचे। मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

📜 ऐतिहासिक महत्व
कल्चुरीकालीन स्थापत्य शैली में निर्मित यह मंदिर 10वीं–11वीं शताब्दी का बताया जाता है। मंदिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना है, जिसमें केवल एक चौकोर गर्भगृह और वक्र रेखीय शिखर विद्यमान है। इसके बाहरी दीवारों पर चैत्य शैली की सुंदर नक्काशी एवं प्राचीन प्रकोष्ठ दिखाई देते हैं, जो इसकी स्थापत्य भव्यता को दर्शाते हैं।
🧾 जनश्रुति और मान्यता
जनश्रुति के अनुसार इस मंदिर का निर्माण एक बंजारे ने अपने स्वामीभक्त कुत्ते की समाधि पर कराया था, जिससे इसे ‘कुकर्रामठ’ नाम मिला। वहीं कुछ पुरातत्वविद इसे कल्चुरी शासक कोकल्यदेव द्वारा शंकराचार्य के ऋण से उऋण होने के उपलक्ष्य में बनवाया गया मंदिर मानते हैं। इसे ‘ऋणमुक्तेश्वर’ नाम इसी से मिला है।
🙏 श्रद्धालुओं की आस्था
ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है, उसे सांसारिक ऋणों और मानसिक क्लेशों से मुक्ति मिलती है। इसी कारण श्रावण सोमवार को यहाँ दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुँचते हैं।











