डिंडौरी। गौरतलब है कि फल उत्पादन बढ़ाने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की मंशा से प्रदेश सरकार द्वारा 15 अगस्त को शुरू की गई “एक बगिया मां के नाम” योजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। योजना के तहत जिले में चयनित 726 महिला हितग्राहियों के लिए फलदार पौधों की आपूर्ति एक ही सप्लायर से किए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, योजना के अंतर्गत प्रत्येक हितग्राही को फलदार पौधों के साथ सुरक्षा हेतु तार फेंसिंग, सिंचाई के लिए जल व्यवस्था और जैविक खाद उपलब्ध कराई जानी है। इसके लिए सरकार द्वारा प्रति हितग्राही लगभग 78 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। पौधरोपण के लिए पौधों की खरीद और वितरण की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय की गई थी।
बिना टेंडर प्रक्रिया के सप्लाई का आरोप
आरोप है कि जिले में पौधों की आपूर्ति के लिए बिना किसी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के एक निजी सप्लायर का चयन कर लिया गया। इसी सप्लायर से 726 हितग्राहियों के लिए पौधे खरीदे गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों का कहना है कि बाजार में अन्य नर्सरियों में पौधे कम दरों पर उपलब्ध थे, इसके बावजूद एक ही सप्लायर को लाभ पहुंचाया गया।
गुणवत्ता और निगरानी पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक, सप्लाई किए गए पौधों की गुणवत्ता की समुचित जांच नहीं की गई। कई स्थानों पर पौधे सूखे या कमजोर पाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हितग्राहियों का कहना है कि पौधों का बिल उनसे हस्ताक्षर कराकर पास कराया जा रहा है, जबकि उन्हें पौधों की गुणवत्ता परखने का अवसर नहीं दिया गया।
जांच की उठी मांग
मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि योजना में अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और सप्लायर पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।










