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आसमानी आफत से छुटकारा पाने बैगाचक की महिलाओं ने रखा बिजली व्रत..मिट्टी के टीले के समीप छींद के पौधे की पूजा कर आपदा दूर भगाने की कामना

Kashi Agrawal

डिंडौरी। प्राकृतिक आपदा विशेषकर आसमानी बिजली के खतरे से निजात पाने बैगाचक क्षेत्र की महिलाओं ने सोमवार को सामूहिक रूप से बिजली उपवास रखा। आदर्श ग्राम पंचायत चांडा के दादर टोला की सैकड़ों महिलाओं ने व्रत रखकर बादल बिजली जैसी प्राकृतिक आपदा को दूर भगाने लिए गांव की सरहद पार कर इंद्रदेव की आराधना की और धार्मिक अनुष्ठान भी किया। बारिश के दौरान बादल से उत्पन्न होने वाले संकट से छुटकारा पाने की कामना की। इस कार्य के लिए पहले तो गांव की सभी महिलाओं ने चंदा एकत्र किया तथा उक्त राशि से उन्होंने पूजन सामग्री और प्रसाद और अन्य सामाग्री खरीदी । फिर सैकड़ों जनजातीय महिलाओं ने सुबह से ही बिजली व्रत धारण किया। जिसके बाद सभी महिलाओं ने गांव की सीमा पार जिसे मेड़ो भी कहा जाता है, गांव से लगभग चार किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हुए उस स्थान पर पहुंची। गांव की महिलाओं में ज्यादातर बैगा समाज की महिलाएं ने साल वृक्षों के बीच जंगल में पहुंचकर मिट्टी का एक टीला और छींद के पौधे की खोज की जिसके बाद बादल देवता को मनाने उनकी पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर बादल देवता को नारियल, सुपारी, सूई, कपड़ा, प्रसाद और अन्य सामग्री भेट की गई। दूध और जल चढ़ाकर इंद्रदेव से आसमानी बिजली जैसी आफत से बचाने का आह्वान किया। जिसके बाद सभी महिलाएं ने एक स्थान पर जमा होकर प्रसाद ग्रहण किया।

यह है मान्यता –

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपवास रखने के पीछे आदिवासी महिलाओं की मान्यता है कि यह व्रत इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए धारण किया जाता और छींद के पौधे की पूजा की जाती है है महिलाओं ने बतलाया कि हमारे गांव क्षेत्र के इर्द गिर्द आसमानी बिजली जैसी आपदा प्रकट न हो आपदाओं को गांव की सीमा से बाहर भागने के लिए गांव के बाहर अनुष्ठान किया जाता है। हमारे बाल बच्चे और घर परिवार सलामत रहे। पूजा के मौके पर बादल देवता को सुई को बाण का प्रतीक मानकर अर्पण किया जाता है। दादरटोला की एक बैगा बुजुर्ग महिला ने बताया कि बादलों से प्रकट होने वाली प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए गांव की लगभग सैकड़ों महिलाओं ने बिजली व्रत धारण किया है और यह सिलसिला करीबन तीन सालों से चला आ रहा है जानकारी के अनुसार यह व्रत प्रतिवर्ष सावन भादो से लेकर कुवांर कार्तिक के महीने तक सोमवार के दिन ही धारण किया जाता है और आपदा विपदा को गांव की सरहद पार बाहर करने हेतु छींद के पौधे और मिट्टी के टीले के समीप बादलों की पूजा की जाती है। महिलाओं ने बताया कि बरसात के दिनों में खेत में काम करने के दौरान आकाषीय बिजली का खतरा बना रहता है, जान माल का नुकसान से बचा जा सके इसके लिए ही यह अनुष्ठान किया जाता है।बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस व्रत को धारण करने का प्रचलन भी है आसपास के गांव की महिलाएं भी इसी तरह बिजली उपवास रखती है।

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