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शहपुरा पहुंची दादा गुरु की पदयात्रा, अन्न का त्याग कर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे दादा गुरु ..दे रहे नर्मदा संरक्षण का जीवंत संदेश

Kashi Agrawal

डिंडौरी।केवल मां नर्मदा के जल पर वर्षों से जीवन यापन कर रहे और जल-संरक्षण को जीवन का संकल्प बना चुके दादा गुरु भैया जी सरकार का शहपुरा अंचल में आगमन हुआ। आधुनिक युग में जहां भोजन के बिना जीवन की कल्पना भी असंभव मानी जाती है, वहीं दादा गुरु ने अन्न का पूर्ण त्याग कर केवल मां नर्मदा के जल को अपना आधार बनाया है।

 

दादा गुरु का कहना है कि मां नर्मदा का जल न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि आत्मा को भी ऊर्जा प्रदान करता है। वे पदयात्रा के माध्यम से जनमानस को नर्मदा की अविरलता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनकी तपस्या, संयम और समर्पण को देखकर हर कोई नतमस्तक हो रहा है।

नर्मदा परिक्रमा के 92वें दिन दादा गुरु टोली शहपुरा पहुंची, जहां कल्याण केंद्र मै रात्रि विश्राम के दौरान भव्य महाआरती का आयोजन होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और भक्तजन उपस्थित रहेंगे। शुक्रवार को यह काफिला कल्याणकेंद्र से प्रस्थान कर आगे की ओर बढ़ेगा।आज के दौर में जहां विवाह के बाद युवा जोड़े आधुनिक जीवन की योजनाएं बनाते हैं, वहीं हरदा जिले के 32 वर्षीय सिविल इंजीनियर विद्युत शर्मा और उनकी पत्नी आध्या ने विवाह के तुरंत बाद नर्मदा परिक्रमा का संकल्प लिया। दोनों का मानना है कि जीवन की नई शुरुआत मां नर्मदा के आशीर्वाद और दादा गुरु के मार्गदर्शन से ही सार्थक हो सकती है।

पद्यात्रा से जुड़े श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा पिछले 90दिनों से अधिक दिनों से निरंतर मां नर्मदा की गोद में चल रही है। यात्रा में लगभग दो हजार श्रद्धालु, साधु-संत और नर्मदा प्रेमी शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन भी सतत निगरानी बनाए हुए है।

शहपुरा क्षेत्र के नागरिकों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर है, जहां उन्हें एक सिद्ध साधक के सान्निध्य में रहकर अध्यात्म और पर्यावरण संरक्षण के बीच मजबूत सेतु का अनुभव प्राप्त हो रहा है।

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